जिस शहर को जल संरक्षण और जल आपूर्ति प्रबंधन समिति के बेहतर कार्यों के लिए 2015 में केपटाउन को अंतराष्ट्रीय पुरस्कार मिला था, तो उसे जल संकट की समस्या का सामना क्यों करना पङ रहा है? इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है।
जलवायु परिवर्तन के कारण ही किसी साल बारिश कम होती है तो किसी साल सूखे का सामना करना पङता है।
केपटाउन दक्षिण अमेरिका में स्थित है, यहां की आबादी लगभग 37 लाख है, यहां पर 6 बङे-बङे डैम है जिसमें सबसे बङा डैम थि वाटर प्रूफ है जो पूरे शहर को 41 प्रतिशत पानी की सप्लाई करता है। इस डैम की क्षमता 48 लाख करोङ घन लीटर है, जो 10 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और रोज इसी डैम से 60 करोङ पानी की सप्लाई पूरे देश केपटाउन में की जाती है। थि वाटर डैम भारी बारिश के पानी से हर साल रिचार्ज होता है, लेकिन 3 साल से बारिश की मात्रा में भारी कमी के कारण यह वाटर डैम लगभग सूख चूका है इसमें पानी की क्षमता अब लगभग 13 प्रतिशत ही रह गई है।
यहां कि सरकार ने इन सब परिस्थितियों के कारण इस शहर को डे जीरो घोसित कर दिया। (डे जीरो का अर्थ उस शहर के पानी का स्तर पूरी तरह से सूख जाना)।
केपटाउन के लोगों को पहले रोज लगभग 88 लीटर पानी मिलता था आज स्थिती यह हो गई है कि सभी लोगों को मात्र लगभग 25 लीटर पानी ही सरकार द्वारा टैंक के माध्यम से पूरे सुरक्षा बल के साथ वितरीत किया ज रहा है, ताकि वहां पर पानी को लेकर कोई झगङा न हो।
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि तिसरा जो विश्वयुद्ध होगा वह पानी की समस्या को लेकर ही होगा। जो हम सभी के लिए चिंतनीय है।


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